Wednesday, 14 February 2018

प्यार मोहब्बत सब धोखा है , पढ़ ले बेटा मौका है

अभी हम तुरंत के ही नए जगह पर शिफ्ट हुए थे ।की ठंढ का मौसम नवंबर का महीना ,चुकी ठंढी ज्यादे नहीं पड़ती है वहा  पर फिर भी जब हवा की ठंढ लहरे बदन को छूती थी तो मनो जैसे बर्फ पड़ रहे हो ।हम टोटल 4  थे ।फ़्लैट लिया था,आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी की ज्यादे महंगा माकन ले सके तो हमने सस्ता ही लिया था ।लेकिन अच्छा था, धीरे धीरे ठंढ बढ़ने लगा ,दिसंबर ,january फिर fabuary का महीना ,अब होली का खुमार धीरे धीरे छा रहा था। इंजीनियरिंग का एग्जाम हो चुका था
 सभी दोस्त घर जा चुके थे ।मै और मेरा दोस्त अनूप (काल्पनिक नाम )दोनों रुक गए ।
हमारे चाल में कुछ फेमली वाले लोग भी रहते थे।उनमे से एक फेमली हमारे बगल में रहते थे।ठीक होली क एक दिन पहले जब मैंने उसे देखा तो मनो जैसे शॉक लग गया ।उसकी आखे जैसे हिरणी की आखे बराबरी नहीं कर सकती ।
उसके होठ धनुष की तरह ,अधर तो मनो जैसे सूरज की रौशनी पड़ने पर कमल दीखता है ।कुछ देर तक मै देखता ही रह गया ।
ओ आई और फिर बालो को लटकाये हुए फिर चली गयी धीरे धीरे उसको पता चला की मै चाहने लगा हु उसको ।चुकी हम नॉर्मली बाटे पहले से ही करते थे ।उसने कुछ नहीं कहा और इसारे किया कुछ, मै पूरा दीवाना हो गया था बहुत सपने देख लिए थे उसको लेकर के ,यह तक की हनीमून भी । उसकी उम्र यही कुछ 23 की होगी और मै भी ।उसने जैसे ही मेरे कानो में कुछ खा मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए ,आखे मनो खुली की खुली रह गई,चेहरे पे सन्नाटा ,और फिर मन में निराशा।सरे सपने भी टूट गए अरमान बिखर गए ।
तभी ,मेरे दोस्त ने बोला
"प्यार मोहब्बत सब धोखा है ,
पढ़ ले बेटा मौका है "
(इस कहानी का सम्बन्ध किसी भी जीवित या मृत से कोई सम्बन्ध नहीं है ।अगर होता है तो ये केवल संयोग मात्र है )
by Akhilesh rai

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